तुम कर सकते हो !

हम आप सब जानते हैं कि जिस Building की नीव कमजोर हो, उस पर कितना ही सुंदर construction कर उसे कितना ही सजाया जाये सब बेकार ही है । हमारे वास्तविक प्रगति की सुंदर Building भी तब ही बन सकती है जब उसकी नीव मजबूत हो । मेरे विचार से हमारे प्रगति की नीव के दो अंग हैं । पहला माता- पिता, दूसरा School . उन्नति एवं हमारे विकास में School की एक अहम भूमिका होती है । क्योंकि कब हमें डांट फटकार और सजा की आवश्यकता है और कब हमें Motivation की जरूरत है वो केवल एक अच्छे शिक्षक ही जानते हैं किंतु यह भी निश्चित है कि यदि इस उत्तरदायित्व को शिक्षक ने बखूबी नहीं निभाया तो हमारी उन्नति की स्थान पर कितनी अवनति हो सकती है इसका हम आंकलन भी नहीं कर सकते । इसका एक सच्चा उदाहरण है। मेरी धर्मपत्नी एक स्कूल में शिक्षिका है उसी स्कूल का एक छात्र जो कक्षा सातवीं में पढता था , वह प्रत्येक वर्ष क्लास में First आता था । साथ ही अन्य Activities में भी हिस्सा लेता था किंतु कक्षा सातवीं में उसकी पढाई का और उसके रहन-सहन का स्तर अचानक गिर गया। प्रत्येक unit Test में, Quarterly और Half yearly exam में फेल हो गया । उसके uniform की चमक भी खत्म हो गयी थी। उसकी शिक्षिका ने कक्षा में उसका बात – बात पर मजाक उडाना शुरू कर दिया । वो शांत बैठता किसी से बात भी नहीं करता था । किंतु उसकी इस अचानक बदली हुई परिस्थिति पर शिक्षिका का ध्यान ही नहीं गया कि आखिर ये Intelligent बालक अचानक इस अवस्था में क्यों आ गया ? एक दिन शिक्षिका ने उसके पिताजी को बुलवाया और बताया कि आपका लडका बिगड गया है । उसका मन पढाई में लगता ही नहीं । वो इस वर्ष पास नहीं हो सकता । आप उस पर ध्यान दे, मारें – पीटें जो करें पर हमें आप दोष नहीं देना । उस बालक के पिताजी ने कहा कि मैडम ! मेरे बेटे की मां की अचानक ही मृत्यु हो गयी । मात्र दो दिनों के बुखार में ही वह चल बसी। ये बालक ही एक मात्र संतान है । बच्चा मां के वियोग को सह नहीं पा रहा है । और मैं daily wages वाला श्रमिक हूं । अब आप ही  बतायें कि इस स्थिति में मैं उसे क्या मारूं-पीटूं । ये सुनकर शिक्षिका का मातृत्व जाग गया । अगले दिन से शिक्षिका ने उसका मजाक उडाना बंद किया। वो उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरती । Lunch में उसे अपने डब्बे से खाना खिलाती । घर पर बुलाकर बिना अलग से पैसे लिये पढाने लगी। धीरे-धीरे बालक में परिवर्तन आने लगा । उसे लगता था जैसे फिर मां मिल  गयी । शिक्षिका के इस त्याग और ममता से मुरझाया हुआ बालक खिल गया और कक्षा सातवीं में फिर प्रथम स्थान पर रहा। कक्षायें बदलती रहीं शिक्षक – शिक्षिकायें बदलते रहे किंतु इस शिक्षिका ने उसका साथ नहीं छोडा और बालक बारहवीं कक्षा में पूरे स्कूल में प्रथम स्थान पर रहा ।

अत: कभी- कभी हमारी उन्नति के लिये आवश्यकतानुसार support और Motivation दोनों की आवश्यकता होती है । यह वो खाद है जो मरते हुए पौधे को भी फिर से हरा – भरा कर देती है ।

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