एक बार मै अपने मार्गदर्शक के दर्शन को गया।उन्हें प्रणाम्  करने के बाद मैं उनके पास बैठ गया। कुशल क्षेम पूछ्ने के  बाद उन्होने कहा कि दो सहेलियां थीं उनमे से एक  मछ्ली और दूसरी फूल बेचती थी। मछ्ली बेचने वाली का घर दूर था और फूल बेचने वाली पास ही रहती थी। एक बार बाजार में रात अधिक हो गयी इस कारण  मछ्ली वाली फूल वाली के घर पर रुक गई। फूल वाली  का घर फूलों की सुगंध से भरा हुआ था।मछ्ली बेचने वाली  को इस सुगंध के कारण नींद नहीं आ रही थी।जब अधिक परेशान हुई तो उठकर  मछ्ली की टोकनी से वो कपडा उठा लाई जिसमें मछलियां रख  कर लाई थी और अपने चेहरे पर ओढकर  चैन से सो गई। आगे उन्होने कहा कि  ठीक इसी तरह जब हमारी आद्तें  बुरी हो जाती हैं तो हमें वो ही  अच्छी लगने लगती हैं और हम बुरे काम करते रह्ते हैं पर हमें उस बुराई का एहसास  नहीं होता।

उनकी इस  शिक्षाप्रद कहनी को सुन कर मैं इस पर मनन करने लगा और तब मुझे एक अंग्रेजी की कहावत याद आई  “habit is the second nature” जिस तरह की हमारी आदतें  बन जाती हैं हमारा स्वभाव भी वैसा ही बन जाता है। और हमारा स्वभाव हमारे चेहरे पर भी झलकने लगता है। तभी तो चेहरा देखकर अनुभवी लोग बहुत कुछ जान लेते हैं।इसे ही तो Face reading कहते हैं। इस कारण स्वयं को अच्छी आदतों मे ढालना अपना ही काम है इसे कोई और नहीं कर सकता और इसका लाभ भी तो स्वयं को ही होता है। किसी एक व्यक्ति  के अच्छे  होने का लाभ  उसके  परिवार, मित्रों,पडोसी, समाज एवं समूचे  देश को होता है।

कभी- कभी वर्तमान की परिस्थितियों को देख कर  मेरे मित्र कहने  लगते हैं कि आज का समय अच्छाई का नहीं बुराई का समय है। बुराई से ही जल्दी उन्नती मिलती है।किन्तु मेरा ऐसा मानना है कि सत्य कभी नहीं बदलता। और सत्य ही मानक (Standard) है। इस कारण बुरे मार्ग पर चलकर पायी उन्नति वास्तव  में उन्नति नहीं बल्कि अवनति की एक गहरी खाई है  जो बुराई के अन्तिम  एपिसोड (Episode) में समझ में आती है।

कहते हैं कि सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। कुछ  मानक (Standard)अच्छी आदतें जो  हम  सभी अपने  बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं, अपने में ढाल लें और इसका लाभ स्व्यं ही देख लें। जैसे माता – पिता को ईश्वर तुल्य मानते हुए उनसे सच्चे ह्र्दय से प्यार करना एवं उनका सम्मान करना, प्रातः सूर्योदय से पहले उठना,उचित एवं  आवश्यक कुछ शारीरिक व्यायाम  करना फिर थोडी देर उस शक्ति के स्रोत से जुडना  जिससे शक्ति लेकर सारी सृष्टि  चलती है।

मैं विश्वास करता हूं कि ये दो चार अच्छी आदतें ही जीवन की दिशा बदल देंगी। इसका जीवन में चमत्कारिक प्रभाव पडेगा। यह आदतें ही शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, एवं आत्मिक उन्नति का आधार बन जायेंगी।

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