आत्म-सम्मान कैसे बढाएं

 

प्रत्येक व्यक्ति को अपना आत्म सम्मान बनाये रखने की आवश्यकता है क्योंकि, यदि कोई व्यक्ति अपना ही मूल्य कम  आँके तो लोग उसे अधिक क्यों आँकने लगे? यही कारण है कि दुनियाँ हमारा सम्मान कम कर देती है|

इसी बात पर मुझे एक कहानी याद आ रही है जो मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ| एक बार भगवान बुद्ध बैठे हुए थे तभी एक आदमी आया और उनसे पूछा कि भगवन ! जीवन का मूल्य क्या है इस बात पर बुद्ध ने उसे एक बहुमूल्य रत्न दिया और कहा, जाओ और इस रत्न का मूल्य पता करके आओ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना इस रत्न को बेचना नहीं हैं|

वह आदमी उस रत्न को लेकर बाज़ार गया और एक संतरे वाले से पूछा– भाई इस रत्न की कीमत क्या है? संतरे वाले ने उस रत्न को देखकर कहा “12 संतरे ले जाओ और इसे मुझे दे दो”| थोड़े आगे गया तो आलू वाला मिला| उससे भी उस आदमी ने उस रत्न की कीमत पूछी| वह बोला ‘एक बोरी आलू की ले जाओ और इस रत्न को मुझे दे दो’| फिर वह एक सोना बेचने वाले के पास गया और उसे वह कीमती रत्न दिखाया| सुनार उस चमकीले रत्न को देखकर बोला, “50 लाख में मुझे दे दो’’ उसने मना कर दिया तो सुनार बोला 2 करोड़ ले लो या तुम बता दो जितनी कीमत बोलो तुझे दे दूँगा| उस आदमी ने सुनार से कहा लेकिन मेरे गुरु ने इसे बेचने से मना किया है| फिर आगे वह एक हीरे बेचने वाले के पास गया और उसे भी वह कीमती रत्न दिखाया| उस जौहरी ने जब उस बेशकीमती हीरा को देखा तो उसने पहले तो लाल कपड़ा बिछाया, फिर उस बेशकीमती रूबी की परिक्रमा ली माथा टेका और फिर वह उस आदमी से बोला, “कहा से लाया है ये बेशकीमती रत्न” इसकी कीमत तो सारी दुनिया को बेचकर भी नहीं लगाई जा सकती| यह तो बहुत ही बेशकीमती रत्न है|”

फिर वह आदमी हैरान परेशान होकर वापिस भगवान बुद्ध के पास जा पहुँचा और उसने अपने पूरे दिन के घटनाक्रम को बताया और बोला अब बताइए भगवन ! मानवीय जीवन का क्या मूल्य है?

उसकी बात सुनकर बुद्ध बोले, संतरे वाले ने इसकी कीमत “12 संतरे लगाई| सब्जी वाले ने इसकी कीमत “1 बोरी आलू” बताई| आगे सुनार से इसकी कीमत “2 करोड़ बताई| फिर  जौहरी ने इसे बेशकीमती बताया|

इसी प्रकार मानवीय मूल्य का भी है| तुम भी बेशक मुल्यवान हीरा (रत्न) हो| लेकिन, सामने वाला तुम्हारी कीमत, अपनी हैसियत, अपनी जानकारी के अनुसार ही लगाएगा|

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इसलिए हमें भी अपने आत्म-सम्मान को बढ़ाने के लिए अपने खुद की कीमत पहचानना जरुरी है| आप भी अपने-आप में बेसकीमती हीरा ही है बस आपको अपने आपको पहचानना है कि मैं बहुत बहुमूल्य हूँ| जिससे लोग भी आपको मूल्यवान समझेंगे, सही आँकेंगे|

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