पढ़िए अपना –पराया का अंतर जीवन में क्या करता है ?

जब हम किसी के चहरे पर खुशी देखते हैं तो स्वयं ही हमारा चेहरा भी तो खिल उठता है| जिसकी सहायता हमने की है उसकी संतुष्टि देख हम संतुष्ट होते हैं| तात्पर्य यह है कि हम अच्छे कार्य self satisfaction के लिए करते है| ऐसे कार्यों से यदि हमारा इष्ट भी प्रसन्न हो जाए तो सोने में सुहागा|
मुझे, महर्षि टालस्टॉय की कहानी “मोची” में उनने जो एक दृष्टांत प्रकाशित किया था, वह याद आ रहा है|
एक मोची था जिसका नाम मार्टिन था| बड़ा ही अच्छा व्यक्ति था| ईश्वर के प्रति आस्था भी थी|
युवावस्था में ही पत्नी और बच्चों की मौत हो गई थी सिर्फ एक 12 वर्ष का बेटा बचा था, उसे भी छीन लिया परमात्मा ने| जिससे उसकी आस्था डगमगा गई| परन्तु एक बुज़ुर्ग की सलाह पर उसने फिर से बाइबिल पढना शुरू कर दिया|
एक रात जब वह बाइबिल पढ़ रहा था, और पढ़ते-पढ़ते नींद लग गई परन्तु पूरी तरह से सोया भी न था और उसे एक धीमी सी आवाज़ सुनाई पडी– मार्टिन! ओ मार्टिन! सुनते हो? वह समझ न सका कि, क्या सचमुच किसी ने कुछ कहा ? या सपना था| चारों ओर नज़र दौड़ाई पर कोई न दिखा फिर आँखें मूँद कर सोने की कोशिश करने लगा कि फिर आवाज़ आयी –मार्टिन! कल सड़क पर देखना मैं आऊँगा|
मार्टिन सुबह अपने काम पर गया, बैठकर अपना काम करता रहा परन्तु उसकी निगाह सड़क पर बार –बार चली जाती कि ईसा मसीह आयेंगे|
उसने देखा कि एक बूढा व्यक्ति सड़क की बर्फ हटा रहा था| कहीं वह यही तो नहीं? पर फिर अपने आपको समझाया वे इस हाल में क्यों होंगे| थोड़ी देर बाद वह व्यक्ति ठण्ड के मारे कांपता हुआ मार्टिन के घर की दीवार से सटकर खडा हो गया| उसे देख मार्टिन को दया आयी सोचा एक cup गरम चाय ही पिला दूं तो कुछ गर्मी आये| घर के अन्दर बुलाया और चाय पिलाई| इस पर उसने कहा—“ईश्वर तुम्हारा भला करे| उसकी निगाहें अब भी सड़क पर ही थीं|
थोड़ी देर बाद एक स्त्री, जिसके वस्त्र फटे हुए थे, आयी और मार्टिन के घर की दीवार से सटकर खडी हो गई, जिसके गोद में छोटा सा बच्चा था| कडाके की ठण्ड थी, वह सोच रही थी कि अपने बच्चे को, उन फटे हुए कपड़ों से ढांक लूं ताकि वह ठण्ड से बच सके| मार्टिन को दया आई, बोला –“अरे वहां क्या कर रही हो भीतर आ जाओ” उसने बच्चे को अपनी गोद में ले लिया और खिलाने लगा| अन्दर से कुछ खाने के लिए लाकर दिया और बोला तुम खा लो मैं इसे खिला दूंगा| वह खाकर तृप्त हो गई और बोली मैं तो भूख से मर ही जाती ईश्वर तुम्हारी मदद करे, उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा होगा| मार्टिन ने अपनी पुरानी एक shawl उस बच्चे को ओढा दी| वह औरत चली गयी| रात को जब मार्टिन फिर बाइबिल पढने बैठा तो उसे एक आवाज़ आई जैसे कोई चल रहा हो| दूर अँधेरे में कई छायाएं दिखाई दीं| वह समझ न सका कि ये कौन हैं| इतने में एक आवाज़ आई– मार्टिन! क्या तुम मुझे नहीं पहिचानते? अँधेरे कोने से वही आदमी निकला जिसे उसने चाय पिलाई थी| मुस्कुराया और बादल की तरह गायब हो गया| फिर अँधेरे में वह स्त्री दिखी जिसे खाना खिलाया था, वह भी मुस्कुराकर चली गयी|
जब उसने फिर पढना शुरू किया तो उसपर लिखा था तूने हमें खिलाया जब मैं भूखा था,चाय पिलाई जब बहुत ठण्ड थी|
तुमने मेरे भाइयों को शरण दी,अर्थात तुमने मुझे शरण दी|
मार्टिन का सपना साकार हुआ, उसके ईश्वर उसके यहाँ आए और आतिथ्य स्वीकार किया|

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Comments 0

  1. kumar santosh says:

    Very good blog .keep it up.

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