मैं कल अपनी  एक परिचित महिला से मिलने गई थी, जो recently शिक्षा विभाग में उच्च पद पर आसीन थी, और retire हो गईं| वे अपने फ्लैट में अकेली ही रहती हैं| मैं समझ सकती हूँ इतने लम्बे समय तक कार्यरत रहने के बाद समय गुजारना कितना कठिन है| अब तक समयाभाव सिर्फ अपने काम से काम रखती थीं| मैं जब मिली तो सोचा कि ऐसी कुछ बातें करूँ जिससे उन्हें कुछ अच्छा लगे|

मुझे मेरे पिताजी के श्रीमुख से सुनी हुई कुछ बातें याद आयीं तो लगा कि वही share कर लूँ| मैंने कहा मेरे पिताजी कहा करते थे कि एक सोता हुआ पुरुष, दूसरे सोते हुए पुरुष को नहीं जगा सकता है, यहाँ तक कि सोते हुए हज़ार व्यक्ति भी एक सोते हुए को नहीं जगा सकते| इसके विपरीत एक जाग्रत व्यक्ति हज़ार सोते हुए व्यक्तियों को भी जगा सकता है, अर्थात् जिसकी वाणी सत्य हो, वाणी में मधुरता हो जिसका मन स्वतः ही इतना शांत हो कि जिसके पास जाने मात्र से ही, हमारे विचारों का प्रवाह अपने आप थम जाये, पूर्ण शांति मिले ,वही किसी सोये हुए को जगा सकता है| किसी में ठहराव ला सकता है| जैसे-गौतम बुद्ध ने अंगुलिमाल से कहा था –ठहर जा,और वह ठहर गया और उनका ही होकर रह गया| ऐसों से संपर्क करें|            

  दूसरा उन्होंने स्वाध्याय पर ज़ोर दिया कि यह एक उत्तम साधन है| अभी आपके पास जो समय है उसका सदुपयोग आप ‘अच्छा साहित्य” पढ़कर कर सकती हैं, जो हमारी आत्मोन्नति करे तथा अपने अन्दर भी झाँककर देखते रहें कि हमसे कोई गलती तो नहीं हो रही |मुझे एक दृष्टांत याद आ रहा है| एक व्यक्ति था, जो ईश्वर को पाने के लिए दिनरात रोया करता था उसकी पत्नी यह सब देखती रहती थी और यह भी जान गई थी कि  मेरे पति ने प्रभु को पा लिया| पर अब वे पहले से ज्यादा रोते थे सो उसने कारण पूछ ही लिया| वे बोले – अब तो मैं उनकी कृपा पर रोता हूँ| इसे सुनाने का मेरा आशय यह है कि, उसकी कृपा है कि उसने आपको एक ऐसा  अवसर प्रदान किया जिससे आप  अलग  दिशा में सोच सकें, अच्छे कार्य कर सकें |

आज के समय में कई NGO’S हैं जिनके द्वारा आप कई मूक बधिर (deaf &dumb) बच्चों की, अनाथाश्रम के बच्चों की,वृद्धाश्रमो में जाकर जिनका कोई न हो उनकी, उनसे अच्छी बातें व सेवा कर सकती हैं| जैसा कि एक गीत है –हर देश में तू,हर वेश में तू,तेरे नाम अनेक,तू एक ही है|    अब आप ही सोचिये, ये सब करके आपको कितनी शांति मिलेगी! सिर्फ नजरिया व सोच बदलें तो हम हर परिस्थिति में खुश रह सकते हैं और समाज में एक सम्माननीय व्यक्ति बन सकते  हैं|

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