बात आज के youth से एक पीढी पहले की यानी मेरे बचपन की है। हम दोस्त

लोग बैठे बातें किया करते थे कि मेरे पापा तो हिटलर हैं । किसी ने कहा मेरे पापा तो रावण

हैं । इस प्रकार अनेक उपाधियों से अपने पिता की खूबियां आपस मे Share करते थे । दो बोल

प्यार के कभी पापा से सुने ही नहीं ! हमेशा क्रोध, पिटाई और बात केवल पढाई की। वो जमाना

90% का नहीं था । 60% वाला Student बहुत Intelligent कहलाता था । अधिकांश Parents

तो बच्चों के पास होने पर ही ख़ुश हो जाते थे। 45 – 50 % नंबर मिल गये तो – मेरा बच्चा

अच्छा पढता है। किंतु चाहे Result 60% हो या तीन – चार Subjects में Distinction ( 75%

या above ) भी मिल गये तो भी कोई तारीफ नहीं। कभी बात ही नहीं होती थी पापा से, बस

जब Fee के पैसे मांगना हो या Book ख़रीदना हो तो पैसे मांगना । बस इतनी ही बात होती थी।

Film देखने जाना हो तो मां से Permission भी और पैसे भी। पर कडी हिदायत – “ जल्दी घर

आ जाना , किसी से लडाई- झगडा मत करना । नहीं तो पापा से बता दूंगी। किंतु क्या करें

लडाई- झगडा तो आम बात थी कारण चाहे गिल्ली-डंडा हो या पतंग । जीवन में डर इतना था

कि यदि किसी भी अपरिचित बडे आदमी ने भी सिगरेट पीते देख लिया तो पीट देता था। Life

में freeness थी ही नहीं| लेकिन अब …. पीढी बदली , समय बदला । कोई किसी की Life में

दखल नहीं देता । सब स्वच्छंद ( अपने मन की करना ) हो गये ।

व माता-पिता के बीच । पहले तो पूरा-पूरा GAP ही था ,किंतु अब भी – या तो जानकारी के

अभाव में, या ego के कारण Parents, बच्चों की समस्या को जान नहीं पाते और नतीजा ?

बच्चे का नुकसान ! वो भी किस level तक होगा ? कोई नहीं कह सकता । “तारे जमीं पर”

फिल्म, हम – आप सबने देखा । पापा, बच्चे की problem को जानना ही नहीं चाहते ! बस

90%marks | किंतु Parents यदि Communication Gap को समाप्त करने का प्रयास करते हैं

तो भी तो बच्चों का ही नुकसान होता है ,क्यों कि बच्चों में Maturity न होने के कारण

freeness का गलत लाभ भी लेने का प्रयास करने लगते हैं। जो दिल मे आया कह देते हैं, जो भी

करने का मन किया, करने लगते हैं और ऐसी स्वतंत्रता कभी-कभी गलत रास्ते पर ले जाती है

,क्यों कि Parents का डर समाप्त हो जाता है। जबकि डर केवल प्यार और सम्मान के कारण

होता है। फलत: माता-पिता का सम्मान कम हो जाता है। जो उन्नति का दुष्मन है ।और यदि

Parents के साथ बात करने के लिये, अपनी बातें Share करने के लिये freeness न हो तो बच्चे

निश्चित ही गलत राह पर चलने लगते हैं।

लिये वो क्या-क्या नहीं करते? Financial capacity न होने पर भी ,अपनी संतान को सारी

समय तो बदला किंतु एक बात Common है, वो है Communication Gap बच्चों

प्रत्येक Parents अपनी संतान को उन्नति के शिखर पर देखना चाहते हैं। इसके

सुविधायें देते हैं Extra मेहनत करके, मित्रों से , बैंक से Loan लेकर। इस कारण संतान का भी

यही कर्तव्य है कि Parents के सपनों को साकार करने का पूरा प्रयास करें। किंतु जहां Parents

बच्चों पर अच्छे marks के लिये अत्यधिक दबाव बनाते हैं और दूसरी तरफ बच्चे स्वय़ं को उस

लायक नहीं पाते तो बच्चे डिप्रेशन के कारण आत्म हत्या कर लेते हैं। इसके लिये

यह आवश्यक है कि Parents चाहे कितने ही व्यस्त रहते हों, बच्चों के लिये समय निकालें ,

उन से बातें करें, उनकी किसी भी समस्या को छोटी न समझें। उनको अपनी बात कहने की छूट

दें । उन्हें ignore न करें, भरपूर प्यार दें । वास्तव में माता – पिता को बच्चों का दोस्त बनना

होगा। उनकी बातों को सुनने – समझने के लिये अपने Mind को उस उम्र के हिसाब से set

करना होगा। तभी उनकी बातों , समस्याओं, को समझा जा सकता है और साथ ही आवश्यकता

के अनुसार strict भी रहें। बच्चे भी अपने Parents को ignore न करें। उनकी भावनाओं को

समझें, भरपूर प्यार व सम्मान दें तब बच्चों व माता-पिता के बीच Communication Gap

समाप्त होगा जो प्रत्येक परिवार मे अनिवार्य है।

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