Depression और योग

संसार में हम और आप अनेक समस्याओं से झूझते रहते हैं। हम समस्या का हल खोजते हैं उससे मुक्त होते हैं फिर किसी अन्य समस्या में उलझ जाते हैं यह क्रम जीवनपर्यंत चलता ही रहता है। यदि हम यह सोचें कि संसार में उलझन ही उलझन है तो यह भी निश्चित है कि प्रत्येक समस्या का हल भी है, भले ही हल हमें देर से मिले । वर्तमान समय में जो समस्या Young लोगों में मिल रही है, वह है depression  की । यह एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति अक्सर हर दिन मरता है और फिर depression की पराकाष्ठा में व्यक्ति आत्महत्या जैसे दर्दनाक कदम भी उठाने से नहीं चूकता है ।

हम थोडा विचार करें कि आखिर कोई भी depress होता ही क्यों है? हम कुछ उदाहरणों से इसका विश्लेषण करें। एक बालक को कालेज में किसी ने यदि कह दिया कि “मैं तुझे देख लूंगा” । इस बात का प्रभाव कमजोर पर यह होगा कि वह एक सप्ताह कालेज नहीं जायेगा और उसे रात भर properly नींद भी नहीं आयेगी । वहीं एक जूडो-कराटे का Black belt, चैन से सोयेगा और अगले दिन समान्य रूप से कालेज भी जायेगा । क्योंकि उसे अपने exercise और practice  पर विश्वास है उसका शरीर और मन दोनों ही शक्तिशाली हैं। इसी तरह एक व्यक्ति अपने interest के अनुसार किसी field में आगे बढना चाहता है, उसमें प्रतिभा भी है किंतु उस field के वो seniors जिन्हें ईर्ष्या होती है वे कूटनीति का सहारा लेकर अनेक समस्याएं पैदा करते रहते हैं। कमजोर व्यक्ति या तो field छोड देता है या फिर संसार । इस तरह अनेक उदाहरण हैं किंतु इन दो ही उदाहरणों से एक बात तो स्पष्ट है कि केवल कमजोर व्यक्ति ही depress होता है । ये कमजोरी शरीर की नहीं होती बल्कि यह केवल और केवल मन की कमजोरी है । मैंने एक पागल लडके को देखा जो 4-5 दिनों का भूखा था किंतु चार लोग मिलकर भी उसे control नहीं कर पा रहे थे । उसके एक धक्के से चारों लोग गिर पडते थे। आप विचारें कि उस 4-5 दिनों के भूखे व्यक्ति में इतनी शक्ति कहां से आ गयी ? शरीर तो उसका कमजोर है ही किंतु उसका brain ठीक काम नहीं कर रहा है इस कारण उस के मन में negative thought आता ही नहीं है। इसलिये वो सारी ताकत उसके मन की ही है।

अत: इस depression की समस्या से मुक्ति का एक ही उपाय है कि हम अपने मन को शक्तिशाली बनायें । अब प्रश्न यह है कि मन को शक्तिशाली कैसे बनायें? आप ने देखा होगा कि industry की बडी-बडी मशीनें हो या घर के AC, TV, Computers ये सब काम तब करते जब वो energy( Electric power ) से जुडे होते हैं। energy से जुडे बिना करोडों रुपये की मशीन भी बेकार ही है । इसी तरह मन की शक्ति के लिये भी हमें energy से जुडना होगा । चूंकि हमारे मन का निर्माण प्रकृति से हुआ है अत: हमें उस energy से जुडना होगा जिस energy से पूरी प्रकृति संचालित हो रही है। इस energy को ही हम लोग ईश्वर कहते हैं। इसलिये न केवल “मन” बल्कि हमारे पूरे अंत:करण को शक्तिशाली बनाने के लिये हमें source of energy से जुडना यानी योग करना होगा । अन्य कोई उपाय नहीं है ।

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