अक्सर  हम देखते हैं कि हमारे भविष्य की चिंता करते हुए हमारे माता-पिता इतना कष्ट उठा लेते हैं कि, वे यह भूल जाते हैं क्या इतना काम करने के लिए मेरे अन्दर इतनी शक्ति है? अपनी शक्ति सीमा से बाहर काम कर,बेचारे इतना थक जाते हैं कि बेहोश से  सो जाते हैं| उस वक़्त घर में उनके बच्चे सब कुछ देखते हुए भी उनके काम में हाथ बटाने की बात,या सिर्फ पूछ ही लें की अरे! आप बहुत थक गए? यह भी नहीं करते, जैसे वे ये सोचते हैं कि माँ-बाप हैं अपनी duty कर रहे हैं|

इसी बात पर मुझे एक घटना याद आ रही है| एक महिला थी, उसका एक बेटा था|

जिसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ उसी पर थी| उसका एक ही सपना था कि  बच्चे को अच्छी तरह से पढ़ा लिखाकर, बड़ा अफसर बनाना|

लड़के की पढाई पूरी हुई और वह interview देने किसी company में पहुंचा| इंटरव्यू के २-३ rounds तो बड़े अच्छे से निकल गए|अब आखरी में कंपनी के डायरेक्टर साहब को लेना था और candidate का selection पूरी तरह उन्हीं के हाथों  में था| यह बालक पढाई के साथ साथ extra curricular activities में भी हमेशा अव्वल रहा|

general quota  वाला छात्र भी था, इससे पता चला कि  पूरी fee pay करके पढाई की|

Director ने पूछा कि पिताजी क्या करते हैं? बोला वे तो नहीं हैं| फिर इतनी पढाई कैसे की? किसने पढवाया तुम्हें? उसने कहा मेरी माँ ने| क्या job  करती हैं ? बोला घर-घर बर्तन ,कपड़े,झाडू पोंछा  करती है|

उनने पूछा कि  तुम किसी काम में माँ की मदद करते हो? बोला—नहीं क्योंकि माँ हमेशा कहती  है मैं कर लूंगी बेटा! तुम तो बस पढाई करो|

इस बात पर वे बोले—आज घर जाकर अपनी माँ के दोनों हाथों को पकड़कर अपने माथे से लगाना,उनको चरण समझकर धोना| कल फिर सुबह 11 बजे मुझसे यहीं आकर मिलना|

लड़का job को लेकर आश्वस्त था और सोचा कि appointment letter देने के लिए ही बुलाया होगा|

उसने घर जाकर माँ को  अपने पास बिठाया, और वही किया जो उन्होंने कहा|

माँ को यह सब बड़ा ही अजीब सा लग रहा था,फिर भी पुत्र की इच्छा को टाल न सकी|

माँ की उन हथेलियों को देखकर वह दंग  रह गया कि क्या हालत हो गई है इनकी|

हर दिन काम कर करके तरह –तरह के साबुन लग –लग कर skin एकदम rough हो गई तो कई cuts लगे हुए हैं|

वह बोला बस माँ अब आज तुम कोई काम नहीं करोगी|

11 बजे ऑफिस पहुंचा, और कहा- sir! कल मैंने पहली बार महसूस किया कि   मेरी माँ ने कितना hard work करके मुझे पढाया, उनकी सेवा करके समझ मे आया कि  अरे! मैं तो सिर्फ अपने घर के थोड़े से काम में ही थक गया, ये कितना सारा कठिन कार्य रोज बिना किसी शिकवा शिकायत के करती हैं,मैंने माता पुत्र के इस अमूल्य सम्बन्ध को समझा|

आपकी बड़ी कृपा की आपने मेरी आँखें खोल दीं|  इसपर वे बोले कि मैं भी चाहता हूँ कि तुम भी अपनी माँ के गुणों को adopt करो,क्योंकि तुम किसी भी कंपनी में काम करो, हरएक boss तुममे इन्हीं गुणों को देखना चाहेगा,बिना शिकायत के कठिन परिश्रम और यह कार्य मेरा है, समझकर करना,ईमानदारी से काम करना,कार्य क्षेत्र में भी सब से मधुर सम्बन्ध रखना|

Appointment letter पाकर बेटा घर पहुंचा,खुशी खुशी माँ से कहा –माँ अब तुम्हारे कष्ट के दिन बीत गए | तुम्हारी कृपा से आज मैंने  बहुत अच्छी नौकरी पा  ली है | अब तुम आराम करोगी और मैं कमाऊँगा |आज तुम्हारा सपना पूरा हुआ|

माँ –बेटे दोनों की आँखों में खुशी के आंसू छलक पड़े|

इस कहानी से यह पता चलता है  कि  कई  बार हमें एहसास दिलाने की आवश्यकता होती है|

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