दोस्तों आज सुबह जब मैंने मोबाइल देखा तो उसमे वहाट्सएप मेसेज आया जिसमे मैंने एक बहुत अच्छी प्रेरणात्मक कहानी पढ़ी, वह मैं आप सभी को भी बताना चाहता हूँ|

एक संत अपनी तीर्थ यात्रा पर निकले थे, वे वृन्दावन जा रहे थे और वे कुछ मील की दूरी पर ही थे तब उनके मन में ये ख्याल आया कि पास में एक गाँव है जहाँ पर मैं अपनी रात बिता सकता हूँ और सवेरे उठकर फिर से अपनी यात्रा को शुरू करूँगा|

संत का एक नियम था कि वे केवल उसी घर का जल और भोजन ग्रहण करते थे जिनके घर में लोगों का व्यव्हार और विचार पवित्र हो तो उन्होंने इस बारे में पता किया तब उन्हें किसी ने बताया पास ही ये जो सीमावर्ती गाँव है वहाँ के सभी लोग वैष्णव है और सब के सब कृष्ण के परम भक्त हैं| ऐसा कहने पर संत उस गाँव मे गये और एक व्यक्ति के घर का दरवाजा खटखटाया और उनसे कहा कि ”भाई मैं थोडा विश्राम करना चाहता हूँ, क्या मैं आपके घर रात बिता सकता हूँ? और मैं केवल उसी के घर का भोजन और पानी ग्रहण करता हूँ जिसके घर का आचार-विचार शुद्ध हो| यह सुनकर उस व्यक्ति ने कहा महाराज माफ़ कीजिये मैं तो निरा-अधम हूँ लेकिन मेरे अलावा हर कोई जो इस गाँव में रहता है सभी लोग बहुत ही धार्मिक हैं और बहुत ही पवित्र विचारों वाले हैं लेकिन फिर भी अगर आप मेरे घर में कदम रखकर मेरे घर को पवित्र करते है तो मैं अपने घर को और अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली मानूंगा| इस पर वे कुछ नहीं बोले और आगे बढ़ गये और आगे जाकर एक और व्यक्ति से उन्होंने रात बिताने के लिए विनती की तो उसने भी वही जवाब दिया जो पहले व्यक्ति ने दिया था और इस तरह संत जिसके भी घर गये सबसे यही प्रश्न किया तो सब लोगों ने एक ही जवाब दिया इस पर संत को खुद पर लज्जा महसूस हुई कि वे एक संत होकर इतनी छोटी सोच रखते है जबकि एक आम इंसान तो गृहस्थ हैं और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी कितना उत्तम आचरण लिए हुए हैं कि खुद को सबसे छोटा बता रहा हैं और अपनी भूल समझकर वे एक आदमी के पास गये और उस से कहा माफ़ कीजिये अधम आप नहीं अधम तो मैं हूँ जो जिन्दगी का एक छोटा सा सार भी नहीं समझ सका इसलिए मैं आपके घर रात बिताना चाहता हूँ मैं समझ गया हूँ कि आप सब लोग सच्चे विनम्र सोच वाले है मैं आपके घर का खाना और पानी ग्रहण करके खुद को पवित्र करना चाहूँगा|

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है खुद को छोटा समझना और दूसरों से अपनी तुलना नहीं करना ही आपको असल जिन्दगी में महान आचरण वाला बनाता है|

 

Comments to: हमारा व्यव्हार कैसा हो?

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Attach images - Only PNG, JPG, JPEG and GIF are supported.