एक राज्य में एक बहुत ही धर्मात्मा एवं न्याय प्रिय राजा थे। वे इतने लोक प्रिय राजा थे कि प्रजा उसके दर्शन के लिये सदा उत्सुक रहती थी किंतु राजा के दर्शन आम लोगों के लिये सुगम एवं सुलभ नहीं होता। मंत्री ने राजा से निवेदन किया कि महाराज आप से आपकी प्रजा बहुत प्यार करती है, आपसे मिलना चाहती है। राजा ने कहा कि ठीक है हम अवश्य मिलेंगे। हम भी यह जानने के लिये उत्सुक हैं कि कितने लोग वास्तव में मुझ से प्यार करते हैं । अत: राजा ने एक सार्वजनिक स्थान, दिन एवं समय निर्धारित कर यह एलान कराया कि उस दिन सभी प्रजा जन उनसे मिल सकते है। राजा एक अत्यंत विशाल मैदान में अपने सैन्यबल के साथ उपस्थित हुए और उन्होने पूरे मैदान में अत्यंत मनमोहक मेले का आयोजन करवाया, जिसमे तरह-तरह के करतब दिखाने वाले तथा कई दुकानें थी जिनमें अनेक आवश्यक एवं आकर्षक सामग्री बिक्री हेतु उपलब्ध थी। वहाँ कई तरह के खेल, खिलौने, झूले तथा रंगीन पानी के झरने भी थे।
मेला प्रात: 10 बजे आरम्भ हो गया और राजा भी अपने निर्धारित समय पर आकर सिंहासन पर आरूढ़ हो गये। प्रजा जन अत्यंत प्रसन्न थे कि आज उन्हें अपने राजा से मिलने का मौका मिलेगा, इसलिये प्रजा की चहल- पहल सुबह से ही मैदान में होने लगी। राजा अपने निर्धारित समय रात 9 बजे तक अपनी प्रजा से मिलने, उनके सुख- दुःख जानने हेतु बैठे रहे किंतु केवल एक व्यक्ति ही उनसे मिलने आया।
राजा रात 9 बजे अपने राज भवन लौट गये प्रजा सारी रात मेले का आनन्द लेती रही और भूल गयी कि किस उद्देश्य से वो वहाँ आये थे और सुबह होने पर बहुत पछ्ताये कि अरे ये क्या हो गया ? हम मेले के आकर्षण में इस तरह खो गये कि हमें यह भी याद नहीं रहा कि हम यहाँ क्या करने आये थे ? हम यहाँ मेले के आकर्षण में अपना लक्ष्य ही भूल गये !
यही हाल हम सब का है| हम जीवन में अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं और इसी कारण यथेष्ठ सफलता नहीं मिलती| हम स्कूल के दिनो से ही throughout first class का सपना देखते हैं| कालेज में मन चाहा विषय लेकर पढ़ते हैं कि हम अपना अभीष्ट पाएं किन्तु अक्सर हम इश्क के चक्कर में या अन्य चक्करों में उलझ कर अपना लक्ष्य भूल जाते हैं| फिर होता यही है कि- लक्ष्य तो राजा के दर्शनो का था किन्तु रास्ते में मेले के आकर्षण में अपना लक्ष्य भूल गये|
मेरे एक बहुत ही करीबी मित्र की एक बेटी थी जो 11th में पढ़ती थी| वो बहुत intelligent थी| जीवन में बहुत ऊँचाईयों को छूने का सपना था| वास्तव में NASA Space Research Centre में job करना चाहती थी| वो मुझे पिता तुल्य मानती थी और अपने समस्याएं मुझ से ही share करती थी|एक दिन उसने मुझ से कहा – चाचा जी ! मै love marriage करना चाहती हूँ, मुझे एक लड़के से प्यार हो गया है अब आप बताइए मै क्या करूँ? मैंने कहा बेटी! ज़रूर करो पर अभी नहीं| तुम अभी शादी करोगी तो फिर NASA का क्या होगा? वह बोली – यही तो समझ में नहीं आ रहा है चाचा जी मै क्या करूँ? फिर मैंने पूछा- तुमने कभी TV में भगवान के serials देखें हैं? जिसमें राक्षसों को दिखाया हो! बोली हाँ| फिर मैंने कहा तो क्या तुमने उन राक्षसों के क्रियाकलाप देखे वो कैसी ज़िन्दगी जीते हैं? वह बोली कि वो तो महा दुष्ट होते हैं| मैंने कहा बेटी! हमें उस Character से भी शिक्षा मिलती है| वो बचपन से ही अत्याचार नहीं करते बल्कि वो भी आरम्भ में शिक्षा प्राप्त करते हैं और फिर शिक्षा के बाद कई वर्ष एकांत में तपस्या करके ब्रह्मा एवं शिवजी को प्रसन्न करके उनसे मन चाहा वरदान प्राप्त करते हैं तब ऐश करते हैं| फिर तो वो देवताओं के राजा इंद्र को भी पराजित कर देते हैं| यही हमें भी करना है| हमें भी तपस्या करनी है और मन चाहा वरदान प्राप्त करना है| वह बोली चाचा जी! आज आपकी बात मेरी कुछ समझ में नहीं आ रही है|मैंने कहा देखो बेटी! क्लास 9th से हमारी तपस्या शुरू होती है और अभीष्ट पाने तक चलती है| यानी ठीक उसी तरह जैसे वो राक्षस लोग तब तक तपस्या करते थे जब तक भगवान् प्रकट होकर मन चाहा वरदान न दे दें| वो लोग अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटकते और बड़े ही हठी होते हैं| अपना लक्ष्य पा कर ही दम लेते हैं| तब कहीं पूरी life enjoy करते हैं भले ही फिर भगवान के हाथो ही क्यो न मरना पड़े|
यदि तुम्हे भी पूरी life enjoy करना हो तो तुम्हे भी अपने लक्ष्य का ध्यान रखना होगा कि तुम्हे NASA Space Research Centre में job करना है इसलिए तुम्हारा throughout first class बहुत ही जरूरी है| इस तपस्या को पूरे हठ के साथ किये बिना life enjoy नहीं कर पावोगी क्यों कि ये तुम्हारा सपना है| और NASA में job मिलने के बाद फिर love और love marriage करना | इस period में तुम्हारी बुद्धि का भी इतना विकास हो जायेगा कि love और love marriage के लिए कौन तुम्हारे लिए उपयुक्त रहेगा|
जिनका कोई लक्ष्य नहीं उनके लिए हठ, तपस्या, सपने, career, जैसे शब्द का कोई अर्थ नहीं| उन निकम्मों के लिए तो अपने सपने को पूरा करने के लिए अधिक सोना चाहिए ताकि उनके सपने नींद में ही पूरे हो जायें|

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Comments to: लक्ष्य – भाग २
  • March 10, 2015

    Aajkal ke bacche ye baate nahi samazte isleye bhatak jate hai. ye baate kyo nahi samazna chahte ya isme ruchi kyo nahi hai, ye khoj ka vishay hai.

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