कहते हैं एक बार महाराजा रणजीत सिंह जी कहीं बैठे हुए थे| बहुत अच्छे विचार- शील पुरुष थे| वहीं एक बेरी का पेड़ था| एक लडकी ने एक छोटा सा पत्थर मारा, पांच सात बेर गिरे,परन्तु वह पत्थर साथ ही साथ राजा को भी लगी| उसी वक़्त उन्होंने उस लडकी को बुलाया और जो लडकी डर से कांप रही थी उसे पांच अशर्फियाँ दीं| इसे व्यवहार कहते हैं
दूसरा दृष्टान्त—एक बार एक व्यक्ति जो स्वभाव से मस्त फ़कीर था बैठा हुआ था साथ ही कुछ लोग और बैठे हुए थे| वह व्यक्ति मूड मुडाये हुए था| किसी एक व्यक्ति को सूझी, एक चपत उसके चाँद पर लगा दी, जैसे ही वे मुड़े देखने के लिए इतने में दूसरे ने फिर चपत लगादी| सभी उनपर हंसने लगे| इसपर आकाशवाणी हुई कि ये सब तेरे साथ अन्याय कर रहे हैं बोल, तू कहे तो नाव डुबा दूं | लोग और परेशान करते रहे, फिर ऊपर से आवाज़ आई, फिर भगवान् ने कहा बोल नाव डूबा दूं ? फिर तीसरी बार यही हुआ| फिर यही repeat हुआ, तो उस व्यक्ति ने कहा अगर आप सचमुच मुझसे स्नेह करते हैं तो उनको मेरी जैसी बुद्धि दे दीजिये, इनलोगों का कल्याण कर दीजिये, इनमे अच्छे विचार भर दीजिये |
जीवन में जो हमेशा दूसरों का भला चाहते रहते हैं, ऊपर वाला भी तो उनके बारे में सोचता ही रहता है कि उसका भला कैसे हो| यदि कोई भूखा आपके पास आये और आपने उसे भोजन करा दिया तो वह आपकी सिफारिश करेगा उस ऊपर वाले से कहेगा कि हे परमात्मा! इन्हें , इस तरह के अच्छे विचार,अच्छी भावनाएंप्रदान कर, जिससे ये लोगों का भला कर सकें|
ऐसी ही हृदय स्पर्शी घटना मुझे याद आ रही है, जो कभी कल्याण में पढ़ी थी| job के लिए vacancy निकली थी, सिर्फ एक ही vacancy थी और दो candidates थे| वे दोनों लड़के एक ही क्लास में पढ़ते थे, उनको select करने वाले उनमे से एक के पिताजी थे| जिनके हाथ में था कि किसी एक को select करें| दूसरा लड़का कहने लगा कि कल आपका हमारा निर्णय है| मैं तो नहीं आऊंगा |उसने कहा ऐसा क्यों? आप क्यों नहीं आयेंगे? वहां तुम्हारे पिताजी हैं ही, मेरा आना बेकार है| उसने कहा मेरे पिताजी ऐसे नहीं हैं, कल तुम जरूर आना |लड़का घर गया अपने पिताजी से कहने लगा, चाहे मैं अच्छे marks ही क्यों न ले आऊँ फिर भी आप दूसरे को ही select करना और मुझे छोड़ देना, पिताजी भी बड़े समझदार थे, कहने लगे मैं भी यही चाहता था, ईश्वर तुम्हें कहीं और अच्छी जगह देगा|
जो चीज़ बहुत देर तक भगवान् के ध्यान से न प्राप्त हो वह आशीर्वाद से प्राप्त होती है |
अतः सदा नेकी की राह पर चलो|

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