आए दिन हम देखते हैं कि परीक्षा के दिन करीब आये कि विद्यार्थी घबरा जाते हैं| ऐसे समय अक्सर हम भी अपना धीरज खो देते हैं और उनकी बातें सुनकर  चिडचिडे हो जाते हैं| ऐसी परिस्थिति में हमारा फ़र्ज़ यह है कि हम उन्हें खूब प्रेम दें, वे  पूरी तरह से हमारे  हो जायें इसका प्रयत्न करें| हम पर पूरा विश्वास करने लगें| उसमे हमें सकारात्मक विचार भरने होंगे, अर्थात हमें उनके आत्म बल को बढ़ाना होगा ,क्योंकि आत्म बल में ही सकारात्मक सोच है|

नकारात्मक सोच के परिणाम तो हम सब जानते ही हैं, इससे हृदय में दुर्बलता आती है| जैसे एक योग्य चिकित्सक रोगी से मीठी-मीठी बातें करता है तो रोगी आधा स्वस्थ हो जाता है और उसकी जीवनी शक्ति बढ़ जाती है|

इन सबके अलावा हमें सफलता के लिए आवश्यक बातें भी बतानी होंगी जिससे उनमे सकारात्मक विचार उत्पन्न हों – दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता है, इच्छाओं में ढीलापन नहीं चलेगा |निरंतर उद्योग करना होगा ,विचारों में निर्बलता नहीं होनी चाहिये, अगर ऐसा हुआ तो वह परिश्रम भी करता है और कार्य पूरा होने के पहले ही काम छोड़ भी  देता है, और दूसरे काम में लग जाता है| सफलता के लिए नियम का पक्का होना जरूरी है, स्वभाव से चंचलता छोडनी होगी|  दृढ़ता और लगन के साथ कार्य में जुटना होगा| इच्छा शक्ति में बल लाना होगा जिसके लिए मन में सिर्फ श्रेष्ठ विचारों को ही प्रवेश करने देना होगा|

इन  बातों  को बताते हुए मुझे अपने जीवन की एक सत्य घटना याद आ गई|

मेरे पिताजी के परिचित एक त्रिपाठी uncle ji थे जो नरसिंहपुर के रहने वाले थे| वे चाहते थे कि अपने पोतों को अच्छा पढवाएं, परन्तु वे थक गए परन्तु उनमे कोई परिवर्तन न आया| एक दिन अचानक हमारे घर दो बच्चों को लेकर पहुँच गए, बोले आपका घर तो विद्या मंदिर है, मैं इन्हें आपके यहाँ छोड़ने आया हूँ| हमें आप पर पूरा विश्वास है| आप इन्हें हर प्रकार से योग्य बनायें| मेरी माँ, मेरे भाई बहन, हम सबने पूरी कोशिश की|

सबसे पहले प्रेम से सींचा उनके मन को, क्योंकि बच्चे अपने माँ –बाप को छोड़कर आये हैं वह भी हमारे भरोसे|  फिर अनुशासन सिखाया, समय की पाबंदी सिखाई, कोई maths तो कोई science कोई languages पढाता| साथ ही साथ यह विचार भर दिया कि  कुछ भी असंभव नहीं अगर ठान लिया तो| उनमे इतना आत्म विश्वास जाग गया कि उनके मन में कुछ कर गुजरने की तीव्र इच्छा जाग्रत हो गई| नियम से चार बजे सुबह जगाते पढने बिठाते, उनमे सकारात्मक सोच भरी कि हम बहुत अच्छा percentage  ला सकते हैं|

हमें अपने माँ बाप का नाम रौशन करना है| जहाँ हम रहकर पढ़ रहे हैं उनका भी नाम खराब नहीं करना है| ये सारी बातें समझकर बहुत अच्छे अंकों से परीक्षाएं उत्तीर्ण कर उनने हम सब को वो खुशी दी, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते|

उस वक़्त जो छोटे बालक थे अभी बहुत  बड़े हो गए उम्र में,परन्तु हम लोगों को भूले नहीं और जब भी समय मिले मेरी माँ से मिलकर आशीर्वाद लेने जरूर जाते हैं

ये है सकारात्मक सोच का प्रभाव जो सही समय पर उनमे भरी गई थी| सही मार्गदर्शन व सकारात्मक सोच भी को सही समय पर मिले, सभी उन्नति के पथ पर अग्रसर हों, इसी विश्वास के साथ|

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