आज कल हम सभी अक्सर अपने बच्चों को दो-ढाई साल की उम्र से ही स्कूल भेजने लगते हैं,जहाँ पहुँचते ही कतार बनाना फिर प्रार्थना करना यह पहला काम होता है| इस छोटी सी उम्र में तो बच्चे को कुछ भी पता नहीं होता कि ये प्रार्थना क्या है, हम ये क्यों कर रहे हैं| परन्तु बच्चों को शिक्षक एक अनुशासन में लाते हैं कि पढाई शुरू करने के पूर्व हमें प्रार्थना करनी है| इसे तो हम बड़े होकर ही समझ पाते हैं कि ये प्रार्थना क्या है|

प्रार्थना आत्मा की पुकार है| हम अपने इष्ट के समक्ष, अपने अंतर के भावों को निवेदित करते हैं, प्रार्थना का अर्थ कुछ मांगना नहीं है| जब हमें यह समझ में आ जाये कि यह कार्य मेरे वश में नहीं है, तब उस सर्वशक्तिमान पर भरोसा करते हैं, तब जो भाव मन में आते हैं, उसी का फल प्रार्थना है|
प्रत्येक प्राणी का एक धर्म होता है, जैसे माता का धर्म, पिता का धर्म इत्यादि| इन सबके साथ साथ हमें इस बात को ध्यान में रखना आवश्यक है कि हमें उसे याद करना है जिसने हमें इस दुनियाँ में भेजा है इसके साथ-साथ हम उन सबके लिए भी प्रार्थना करें जो हमारे करीब हैं|
प्रार्थनाएं अलग अलग प्रकार की होती हैं|कुछ इस तरह की होती हैं जिससे हम अपना लक्ष्य साध सकें| दूसरा जिसमे हमारा भला भी जुडा हुआ हो,जैसे मेरे बेटे की नौकरी लग जाये|स्वार्थ वश है| तीसरा –जैसे नदी का जल बहता रहता है,वह तो सबका भला करता जा रहा है परन्तु उसे किसी से कुछ लेने की आकांक्षा नहीं|इसी प्रकार हमें भी किसी से कुछ लेना नहीं| मेरा मालिक सब पर दया करे ,सबका भला हो इत्यादि| इस प्रकार की प्रार्थना सर्वश्रेष्ठ है|
महात्माओं सूफी संतों आदि को अगर देखें तो वे हमेशा सब पर अहेतुकी कृपा ही करते हैं| इनकी प्रार्थनाएं हमेशा मौन हुआ करती हैं, उसके दो कारण हैं एक तो शब्दों का बोझ न होने के कारण वे जल्दी फल दायक होते हैं और ये लोग कभी भी किसी को भी acknowledge नहीं करते कि तेरा यह कार्य मेरी प्रार्थनाओं के कारण हुआ|
एक बात और भी है कि प्रार्थना कितनी लगन से, कितने मन से, कितने
एकाग्रचित्त होकर कर रहे हो, यह भी मायने रखता है|
प्रार्थनाएं तो तीनों प्रकार की स्वीकृत होंगी, परन्तु पहले किसकी प्रार्थना स्वीकृत होती है –.
1.उसकी, जिसने प्रार्थना में अपने लिए कुछ नहीं माँगा|
2.जो दूसरों के लिए मांग रहा है|
3.जो अपने स्वार्थ के लिए कर रहा हो|
1.संत महात्मा जैसे निजामुदीन औलिया ,मोइनुदीन चिश्ती –कोई भी इनसे प्रार्थना करे तो तुरंत तकलीफ दूर हो जाती क्योंकि प्रार्थनाओं के बदले उन्हें कुछ भी नहीं चाहिए|
2.एक माँ ने अपने बेटे के लिए प्रार्थना की| इसमें माँ की खुशी का स्वार्थ जुडा हुआ है| इसमें प्रार्थना की सुनवाई में कुछ समय लगेगा|
3. प्रार्थना खुद के लिए –1.रावण अमर होना चाहता था| इस प्रार्थना की सुनवाई में सबसे अधिक समय लगेगा|

प्रार्थना किसकी करें –हम अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग सौम्यरूपी भगवान् की प्रार्थना करते हैं तो उनमे से सौम्यता छलकती है, कुछ लोग रौद्र रूपी की प्रार्थना करते हैं तो उनके चेहरों में भी उग्रता दिखने लगती है जैसे लाल –लाल आँखे,गुस्सैल चेहरा आदि| ये शक्ति के उपासक होते हैं|
जिसे देखकर आपके मन में श्रद्धा जागे, जिसके पास बैठकर आपके तर्क वितर्क शून्य हो जाएँ, उसे अपना गुरु या मार्गदर्शक मानें और उनको follow करते जाएँ| सारे अहंकारों को त्यागकर, भोले-भाले भाव लेकर जिज्ञासु बन उसके सम्मुख पहुँचो| राह पकड़ तू एक चलाचल वाली बात याद रखें |हार्दिक प्रार्थना के द्वारा भक्त अपने इष्ट अथवा परमात्मा से समीपता प्राप्त करता चला जाता है| प्रार्थना ही हमें संकट और दुःख की आंधियों से बचाती है| कैसी प्रार्थना करें,कैसे करें, यह तो हृदय ही जान पायेगा|

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