प्रेम की गंगा

आज सुबह जब मैं what’s App  messages check कर रही थी, तो मैंने देखा कि इतना हृदय स्पर्शी message था, साथ ही साथ शिक्षाप्रद भी| यह सीखने की क्रिया तो जन्म से शुरू होकर आख़री सांस तक चलती ही रहती है, चाहे कोई छोटी से छोटी बात हो या कोई  बड़ी से बड़ी बात ही क्यों न हो| मैं इस कहानी के माध्यम से एक बड़ी अमूल्य चीज़ share करना चाहती हूँ|

एक दिन एक छोटा सा बालक अपने घर पर एक Brief case लेकर उसमे दो dresses रखकर, कुछ cake pieces रखकर भगवान् की खोज में निकल पड़ा|

काफी दूरी तक चलता रहा,एकदम थक गया,पास में ही उसे एक पार्क मिला,और वह वहां जाकर बैठ गया| उसने देखा कि थोड़ी सी दूरी पर एक बूढी औरत बैठी है,वह बालक उसकी तरफ देखने लगा| उसे ऐसा एहसास हुआ जैसे वह भूखी है, इसलिए उसने एक cake piece ले जाकर उसे दिया| वह तो वास्तव में ही भूखी थी, और तुरंत खाने लग गई| वह बालक उसे खाते देख बहुत खुश हो रहा था| औरत भी उस बच्चे के खुश चेहरे को देखकर बहुत खुश हो रही थी, और वह बालक भी उसके खुश चेहरे को देखकर चाहता कि यह इसी तरह खुश दिखती रहे| कुछ देर बाद उसने फिर वही काम दोहराया, फिर केक का टुकड़ा दिया, उसके चेहरे पर फिर से ख़ुशी छा गई, बड़ी प्यारी मुस्कराहट थी उसके चेहरे पर,उसे देखता और बालक भी खुश होता| दोनों ही एक दूसरे को देखकर आनंदित हो रहे थे| यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा, परन्तु किसी ने  किसी से एक शब्द भी नहीं कहा|

अब जब अँधेरा सा होने लगा तो बालक घबराया और जाने लगा चार कदम जाकर लौटआया, और उस औरत से जाकर लिपट गया, उस औरत ने भी उसे प्यार किया और उसका माथा चूम लिया बड़ी प्यारी मुस्कान के साथ|

बालक ने घर लौटकर जैसे ही दरवाज़ा knock किया, माँ आई और अपने बच्चे का ऐसा खिलखिलाता चेहरा देखकर एकदम खुश हो गई और बोली –क्या बात है बेटा! आज तुम इतने खुश कैसे हो? उसने जवाब दिया –माँ मैंने आज भगवान के साथ LUNCH किया,उसकी माँ उससे कुछ पूछती उसके पहले ही उसने बता दिया कि –माँ! तुम्हें पता है उसकी मुस्कान कितनी प्यारी है?  ऐसी प्यारी मुस्कान मैंने पहले कभी देखी ही नहीं| इस बीच वह औरत भी अपने घर पहुंची| उसके बेटे ने दरवाज़ा खोला और माँ के मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर जिसमे एक अजीब सी शांति थी, दंग रह गया, और बोला—आज तुम इतनी खुश कैसे?

माँ ने कहा आज मैंने भगवान् के साथ park में  cake खाया, बेटे के कुछ कहने से पहले ही बोल पडी कि मैंने जितना बड़ा होगा करके expect किया था, उससे बहुत छोटा है|

उस सर्वशक्तिमान की शक्ति को हम बहुत जल्दी under estimate   कर देते हैं|

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स्पर्श ,मुस्कराहट दयापूर्ण शब्द सुनने वाले कान,कोई honest compliment ,या कोई छोटा सा कार्य, जो caring हो,ये सभी चीज़ें जीनेकी शक्ति को दुगुनी कर देती हैं |

किसी ने भी तो उसको देखा नहीं,वह कैसा दिखता है, लोग हमारे जीवन में आते हैं, किसी कारण से,या तो कुछ समय के लिए,या पूरे  जीवन भर साथ निभाने के लिए|

सभी को एक जैसा ही स्वीकारो|

क्यों कि  क्या जाने किस रूप में वह सर्वशक्तिमान मिल जाए|

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