प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है|सारे बुध्धि जीवी, विचारक, पंडित एवं विद्वान

यही समझाते हैं कि जीवन को सफल बनाओ| बात तो सही है क्यों कि ये मनुष्य का जीवन मिला है सफल तो

होना ही चाहिए ! किन्तु सफलता की परिभाषा हम सब अलग – अलग तरीके से करते हैं और इस कारण

वास्तविकता से दूर होकर अंत में निराश हो जाते हैं या जीवन के अंतिम पड़ाव में जब हम सफलता का हिसाब

जोड़ते हैं कि इस जीवन में क्या पाया और क्या खोया तो अक्सर ये अहसास होता है, शायद जीवन में व्यर्थ समय

गवाया, जो पाना था वो न पा सके| इस कारण यह आवश्यक है कि जीवन की सफलता को ठीक से परिभाषित

करें, ठीक तरह से जानें और तदनुसार योजनाबद्ध होकर सफलता के लिए सम्पूर्ण मनोयोग से प्रयास करें|

एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के व्यक्ति के लिए धनवान बनना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्यों कि

आज की सारी इच्छाये, आवश्यताएँ केवल पैसे की कमी के कारण पूर्ण नहीं होते| इसलिए उसके सम्पूर्ण परिश्रम की

दिशा केवल धन कमाने की ओर ही होती है| वहीं एक उच्च मध्यम वर्गीय well qualified परिवार के व्यक्ति के

लिए पद और धन दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं क्यों कि उन्हें समाज में अपना status भी बनाए रखना है| तो क्या

हम ये मान लें कि केवल धन कमाना और ऊँचे पद पर काम करना, शानदार मकान बनाना ही सफलता का पर्याय

है? इसका उत्तर – “है” और “नहीं” दोनों हैं| क्यों कि ये सफलता उस खास goal की है जिसे हम पाना चाहते थे|

उत्तर “ है” इसलिए कि ये जीवन में सबसे अधिक आवश्यक है| क्यों कि जिस के जीवन में धन और मान –

प्रतिष्ठा दोनों न हों तो फिर ये जीवन भी क्या जीवन? जिस समाज में हम जी रहे हैं, सम्मान के साथ जियें, ऐसी

इच्छा सभी लोगों की होती है और सब इसके लिए ही प्रयासरत भी रहते हैं| किन्तु ये सफलता भी सब के हाथ

नहीं आती| इसका कारण है हमारा हमारे प्रति इमानदारी का न होना यानी हम अपने साथ ही बेईमानी करते हैं|

हमारी आरम्भ से ही न तो कोई कार्य योजना होती है न ही goal का कोई निर्धारण| इस कारण हमारे परिश्रम की

दिशा भी ठीक नहीं होती फलतः निराशा हमारे आगवानी के लिए खडी रहती है| और “नहीं” इसलिए कि मानव

जीवन का मूल उद्देश्य यह नहीं है| ये बहुत सारा धन कमाना और ऊँचे- ऊँचे पदों पर काम करना, शानदार मकान

बनाना, शादी करना इत्यादि इत्यादि, ये मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिए आज के परिवेश में आवश्यक प्रतीत होता है|

वास्तव में आवश्यक है जीवन को स्वाभिमान के साथ जीना| ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, सत्यनिष्ठता, सेवा जैसे

महान गुणों को स्वयं में धारण कर जीवन जीना, समाज के लिए और समाज के हित में कार्य करना और जीवन

समाप्त होने के पूर्व मानव समाज को एवं मानव समाज के हित के लिए कुछ देकर जाना ये उद्देश्य कुछ महान

लोगों के रहे हैं जिनके सफल जीवन का गुणगान सभी एक स्वर से करते हैं|ये महापुरुष वैज्ञानिक, डाक्टर, और

समाजसेवी बनकर समाज के हित के लिए आजीवन कार्य कर अपने जीवन को सफल करते हैं| इस कारण यह

देखने में आता है कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन की सफलता को अपने हिसाब से परिभाषित करता है और उसी प्रकार

से कार्य करता है| किन्तु हर सोच सही हो यह जरूरी नही| क्योंकि जिस प्रकार हम universal truths को मानते हैं

इसी तरह यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि संसार में बहुत परावैज्ञानिक सत्य भी हैं, जिनके शोध कर्ता भी उस क्षेत्र

के वैज्ञानिक हैं जिन्होंने संसार को यह बताया कि जीवन की वास्तविक सफलता है – “निज विकास ” इसी का

पर्यायवाची(synonyms) शब्द है “ आत्म उन्नति ” और उन्होंने यह भी बताया कि यह “ आत्म उन्नति ” student

life से लेकर, आगे job करते हुए परिवार, समाज सबके कार्यों को Normally करते हुए ही करना होता है| आप कहेंगे

कि आखिर ये उन्नति कौन सी उन्नति है? और इस उन्नति से क्या लाभ है जबकि हम प्रत्येक क्षेत्र में मेहनत

करके आगे बढ़ रहे हैं और सफल हो रहे है| इसका उत्तर यह है कि – मनुष्य में अनेक उर्जा के केंद्र हैं जो

साधारणतया सुशुप्त स्थिति ( inactive position) में रहते हैं| उन्हें activate करके स्वयं का सर्वांगीण विकास

किया जाता है| ऐसा विकसित व्यक्ति न केवल स्वयं उर्जा का एक केंद्र ही बन जाता बल्कि दूसरों के निज विकास

में भी सहायक बन जाता है| आप जानते है कि संसार में सब पर दुःख आते है किन्तु आत्म उन्नति किया हुआ

व्यक्ति दुःख में भी दुःखी नहीं होता| वह उसे भी Normally सह कर अपने कार्य करता रहता है| वह हर हाल में

हमेशा खुश रहता है| वह जिसके साथ रहता है वह भी आंतरिक रूप से प्रसन्न रहता है| आप जानते हैं कि हमारे

बुजुर्ग लोग हमेशा यह आशीर्वाद देते हैं कि “ खुश रहो ” किन्तु यह न तो आसान है न ही किसी आम आदमी को

लिए संभव है| और हर व्यक्ति संसार में खुश ही रहना चाहता है और उसके सारे प्रयास (पैसे, पद , सम्मान

इत्यादि) भी खुश रहने के लिए ही तो होते हैं| किन्तु खुश रह नहीं पाता| किन्तु आत्म उन्नति किया हुआ व्यक्ति

हर समय खुश रहता है| इसलिए आत्म उन्नति या निज विकास ही वास्तव में मनुष्य का सर्वंगीण विकास है| इस

उन्नति के लिए हमें उस व्यक्ति से मिलना होगा जो यह उन्नति कर चुका हो|

यदि हम विचार करें तो यह समझ में आता है कि जीवन का समय बहुत कम है| यदि स्वस्थ

जीवन का average age 70 साल मान लें और उसमे से पैदा होने से लेकर समझ आने तक के years + हमारे life

की average नींद के hours घटा दिया जाये तो समझ में आता है कि जीवन में कुछ करने के लिए समय बहुत

कम है| फिर उन्नति और जीवन के सर्वंगीण विकास के लिए waste करने के लिए time ही नहीं है| कोई भी सफल

व्यक्ति अपने जीवन में समय को गंवाता नहीं| वह समय की कीमत को समझता है| आप देखें कि तीन काल में

भूत काल एवं भविष्य काल तो अनंत है किन्तु वर्तमान काल ही सबसे छोटा होता है| एक पल बीतते ही वह भूत

काल बन जाता है| आप यदि थोडा Film की रील पर विचार करें| एक तरफ से खुलती है और दूसरे तरफ लिपटती

जाती है| जिस तरफ से खुल रही है, वह भविष्य काल, जो दूसरे तरफ लिपट गई वह भूत काल और रील का वह

भाग जिस पर प्रकाश पड रहा है और परदे पर दृश्य दिख रहा है वह वर्तमान काल| Film चल रही है और यदि

हमारा ध्यान १-२ पल के लिए भी कहीं भटक जाता है तो हम कभी – कभी कहानी का ख़ास मोड़ देख नहीं पाते

और कहानी समझ में नहीं आती| फिर हमें किसी से पूछना पड़ता है कि कहानी में क्या दिखा दिया था !अब आप

वर्तमान के इन पलों का महत्व समझिये कि मात्र १-२ पलों की चूक से कहानी समझ में नहीं आती| यही बात

हमारे जीवन पर भी लागू होती है| वर्तमान थोडा भी miss किया तो हमारा goal भी miss समझो| एक गरीब

व्यक्ति जब गेहूं, चांवल या कोई अनाज साफ करता है तो एक भी दाना या कण फेंकता नहीं| वो एक-एक दाने की

कीमत समझता है| इसी तरह हम भी संसार में “वर्तमान” के गरीब हैं, इसे waste करना मतलब “वर्तमान” के

महत्त्वपूर्ण पलों को waste कर “भूतकाल” में बदल देना कितना दुखदायी हो सकता है ! क्यों कि ये वो पल हैं जिन्हें

हम वापस नहीं ला सकते| इसलिए एक सफल जीवन जीने के लिए स्वाभिमान, समाज में मान – प्रतिष्ठा, एक

सम्माननीय पद, एवं धन के साथ – साथ निज विकास (आत्म उन्नति) कर, स्वयं को सम्पूर्ण विकास में लाना

आवश्यक है|

आज आपसे यही कहूंगा कि जीवन की सफलता पर फिर से विचार करें और अपने goal को

achieve करने के साथ – साथ अपने सर्वंगीण विकास यानी आत्म उन्नति पर भी विचार करें और अपने

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