मैं एक दिन टी.वी. पर क्रिकेट मैच देख रहा था। एक गेंदबाज की गेंद पर टिप्पणी करते हुए कामेन्टेटर (commentator) )  बोला ” गेंदबाज की इस गेंद में कोई दम नही था लेकिन  बल्लेबाज ने एक रन चुरा लिया”। कमेन्ट्री (Commentary)   की यह पंक्ति मेरे दिल पर कुछ  अलग ही असर  कर गयी। मैंने सोचा वास्तव मे जिन्दगी में कोई दम नहीं  है  लोकिन हंसी, खुशी के  पल उस बल्लेबाज की तरह चुराना पडेगा  नहीं तो जीवन नीरस हो जायेगा।

आजकल तो जीवन जीने का ढंग ही बदल गया है। यदि कमी है तो केवल समय की। करना  तो  बहुत कुछ चाहते  हैं किन्तु समय नहीं मिलता। हमारी रुचियां  ( hobbies  ) हमारी इच्छायें सब दरकिनार हो जाते हैं बस समय  की कमी। हम एक मशीन की तरह हो गये हैं । अपनी आवश्कताओं और सुख की तलाश में हम दिन- रात एक कर देते हैं। सामान्यतः हम अपनी रुचियों ( hobbies  )  या अध्यात्म की साधना के लिये फुरसत का समय  चाह्ते हैं किन्तु इसके मिलने की कोई सम्भावना  नहीं  रहती इस कारण कोई कहता है कि नौकरी से सेवानिवृत्त (Retire) होने के बाद  केवल ईश्वर की आराधना ही करुंगा। कोई कहता है कि अपनी रुचियों ( hobbies  )  के लिये तो सेवानिवृत्ति (Retirement ) के बाद ही समय मिल पायेगा। कोई ये सोचता है कि बच्चों की शादी कर दूं  फिर समय ही समय मिलेगा। लोकिन अपने सोचने से क्या होता है?  ” न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाये”

ये तो सब जानते हैं कि जीवन का समय सीमित है। कितना है? ये कोई नहीं जानता। एक महापुरुष  ने अपने एक शिष्य से पूछा कि तुम्हारी अध्यात्मिक साधना क्या ठीक चल रही है? शिष्य  ने उत्तर दिया कि ” महाराज जी समय नहीं मिलता”।महपुरुष  बोले- एक बार एक दरोगा घोडे पर सवार होकर लम्बी यात्रा पर निकला। काफी दूर चलने  के बाद उसे खेत में एक रहट चलती हुई दिखाई दी।पिछले जमाने में कुंए से लगातार पानी निकाल  कर खेतों की सिचाई  करने के लिये रहट  का उपयोग करते थे। इससे पानी तो लगातार निकलता है लेकिन खट- पट की बहुत आवाज होती  है।  उस जमाने में  बिजली के  पम्प नही होते थे। दरोगा ने सोचा कि घोडा प्यासा होगा इसे यहीं पानी  पिला देना चाहिये और वह घोडे को रहट के पास लेकर गया। घोडा पनी तो पीना चाह्ता था  लेकिन   खट -पट की आवाज से  वह डर कर  दूर भागने लगा। दरोगा ने पानी चलाने वाले से कहा कि भाई!  ये खट-पट बंद कर दो। उसने रहट चलाना  बंद कर दिया इससे  पानी निकलना भी बंद हो गया। दरोगा  ने फिर कहा कि भाई! पानी चालू रखो पर खट- पट बंद करो।रहट वाले ने कहा- दरोगा साहब! घोडे को पानी पिलाना हो तो इसी खट- पट  में पिला लो वरना प्यासे ही जाना पडेगा।

हम  शान्ति से विचार करें तो पता चलेगा कि जीवन की खट- पट  कभी बन्द नही हो सकती। जीवन में कभी फुरसत का  समय या शांतिमय  समय  मिलेगा या नहीं ये कोई नहीं जनता। इसलिये कभी मत कहो कि ” समय नहीं है” बल्कि ये सोचो कि ” जो भी है बस यही इक पल है”। 

जीवन को नीरस मत बनने दो। हम सुख एवं संसाधनो की होड में जीवन की खुशी , हंसना भूल गये   हैं। जीवन में प्रसन्नता तभी मिल सकेगी जब हम इसी व्यस्त समय में से  अपनी   रुचियों ( hobbies)  संगीत, अध्यात्म इत्यादि के लिये समय निकालें वरना हमें भी प्यासे ही जाना पडेगा क्योंकि  जिन्दगी की  खट- पट तो आखरी  सांस तक चलती  रहेगी।

 

 

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