प्रत्येक व्यक्ति को विवेक की बड़ी आवश्यकता होती है| जिसका विवेक जाग्रत हो वही जान सकता है कि कौनसा कार्य करना उचित होगा और कौनसा अनुचित होगा| अविवेकी व्यक्ति हमेशा न करने योग्य कार्यों को, सही गलत की परख न होने के कारण कर बैठता है और फिर एक चक्रव्यूह में फँसता ही चला जाता है और दुखों को भोगता है| कई बार तो ऐसा भी होता है कि हमारे समक्ष कई चीज़ें रखी हुई होती हैं और option हमें दिया जाता है कि अपनी पसन्द की वस्तु choose कर लो| फिर वही समस्या! गलत वस्तु चुन लेते हैं|
इसी बात पर एक छोटी सी कहानी याद आ रही है — एक समय की बात है| एक राजा था जिसने न जाने क्यों बड़ी ही अजीब सी घोषणा करवा दी| कल सुबह मेरे राज महल का मुख्या द्वार खोला जायेगा| वहां तरह तरह की वस्तुएं रखी होंगी,जो भी व्यक्ति, जिस किसी भी वस्तु को स्पर्श करेगा, वह वस्तु उसकी हो जायेगी|
इस समाचार को सुनते ही सभी बेहद खुश हो गए, और कहने लगे कि मुझे तो जल्दी से जल्दी, ज्यादा से ज्यादा चीज़ों को हाथ लगाना है जो कि मुझे पसंद हैं| लोगों ने अपनी अपनी लिस्ट तैयार कर ली, और सुबह होने की इंतजारी में रात भर सो भी न पाए| कोई हाथी – घोड़ों की तरफ, तो कोई सोना चांदी, हीरे जवाहरात की तरफ, तो कोई दुधारू जानवरों की तरफ़ भाग रहे थे| हरेक को यही डर था कि कहीं कोई मेरी मन पसंद वस्तु पर पहले हाथ न लगादे| imagine कीजिये लोग कितने tension में और कितनी हडबडी में होंगे| कैसा कल्पनातीत दृश्य होगा!
प्रात:काल हुआ| महल के द्वार खुले| राजा भी इस नज़ारे का बड़ा ही आनंद लेने के लिए राज सिंहासन पर विराजमान थे| भीड़ तो ऐसे टूट पडी कि अवर्णनीय|
उसी वक़्त एक छोटी सी लडकी आयी,और धीरे-धीरे राजा की तरफ़ बढ़ने लगी| राजा को लगा कि छोटी सी बच्ची है मुझसे कुछ पूछने मेरी तरफ आ रही होगी|
वह वहां पहुंचकर राजा को छू दी| बस अब क्या था? राजा ही उसके हो गए और राजा की सारी property भी उसी की हो गई|
हम सब कितने ही बड़े हो जाएँ,पर फिर भी इसी भाग दौड़ में लगे रहते हैं कि क्या-क्या बटोर लूं?कैसे बटोर लूं ? और यह भूल जाते हैं, जैसे हमारे बड़ों ने कहा है– एक साधे सब कुछ सधे| एक supreme power को अनन्य भाव से मान लें| उसके कृपा पात्र बन जाएँ तो उसकी हर वस्तु हमारी ही होगी जो वस्तु माता- पिता की हो उसकी संतान उसका उपभोग तो कर ही सकती है| यह सब तभी संभव है जब विवेक जाग्रत हो| जिसके लिए किसी महा पुरुष के पद चिह्नों पर सम्पूर्ण विश्वास के साथ चलना होगा|

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Comments to: विवेक की आवश्यकता
  • September 2, 2016

    We are also working on personality developments , concept of happiness accosting to vedic regim , realy you people doing good job, lot of kudos to you and your team

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